मृत्युभोज एक अभिशाप प्रजापति समाज इस पोस्ट को पढकर विचार विमर्श करे

*मित्रों किया हमारा प्रजापति समाज इस पोस्ट को पढकर विचार विमर्श करेगें*
*पोस्ट थोड़ी कड़वी है* *लेकिन*
*इतनी बड़ी बड़ी नीया्त हुइ है*
*कुछ फायदा बता सकते हैं ..*
*खाली परिवारिक* *कंमपीटिसन*
*जरूर दैखा है* *उससे समाज*
*को कितना नुकसान है कभी सोचा*
*आपने अभी आपके पास वक्त*
*सोचीऐ……….*

*आदमी की मौत हो जाने पर उसके घर पर इकट्ठे होकर सामूहिक भोज में खाने-पीने के शौकीन(पेटारू/जीमारा) लोग कहे रहे हैं कि सभी मृतकों के परिजनों ने लॉकडाउन टूटने के तुरंत बाद मृत्यु भोज करने की हां भरी है इसलिए अभी केवल इसे आगे सरकाया गया है। अर्थात कुछ समय के लिए मृत्युभोज स्थगित किए जाने को बंद नहीं माना जाना चाहिए।*

*इनका कहना है कि लॉकडाउन टूटते ही हमारा पहला काम यही होगा कि इनका मृत्युभोज करवाकर इनके ऊपर से यह बोझ हल्का किया जाए।*

*इधर कुछ लोग इसे मृत्युभोज बंद करने का अच्छा अवसर मानते हुए ये प्रयास भी करने लगे हैं कि जब किसी की मौत के इतने दिन बाद भी मृत्युभोज नहीं करने तथा मृतक की अस्थियां हरिद्वार नहीं ले जाने के बावजूद सब कुछ सामान्य चल रहा है तो क्यों नहीं अब इसे सदा-सदा के लिए बंद कर दिया जाए।*

*एक ओर मृत्युभोज बंद करने के इच्छुक लोग अभी से इसे बंद करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।*

*वहीं दूसरी ओर मृत्युभोज खाने-पीने वाले पेटारू प्रवृत्ति के लोग इस बात को लेकर आश्वस्त है कि लॉकडाउन बंद होते ही हमें हमारे हक का यह भोजन ब्याज सहित मिलेगा।*

*मृत्युभोज बंद करने के इच्छुक जागरूक और संघर्षशील लोगों की सक्रियता के बावजूद पेटारू प्रवृत्ति के लोग जरा भी आशंकित नहीं है कि इनके ये मृत्युभोज भी कभी बंद हो सकते हैं। अर्थात वे इस मामले में पूरी तरह से निश्चिंत है।*

*अतः मृत्युभोज बंद करने के इच्छुक लोगों के लिए यह एक अच्छा अवसर है कि उन्हें अभी से उन्हें ऐसे पेटारू लोगों को चिन्हित करने का काम शुरू कर देना चाहिए जो मृतक के परिजनों पर अदृश्य दबाव डाल सकते हैं अथवा जिनसे भयभीत होने की वजह से मृतक के परिजनों को लॉकडाउन टूटते ही आगे होकर उन्हें मृत्यु भोज करने के लिए अपने घर पर बुलाकर इनके सामने मृत्युभोज के लिए हुए विलंब के लिए अपराध बोध के साथ नतमस्तक होना पड़ेगा।*

*जो लोग भी मृत्यु भोज बंद करने के लिए सक्रिय हुए हैं उनका यह मानना ठीक है कि महामारी के इस दौर में इन पेटारू प्रवृत्ति के लोगों पर मृत्यु भोज खाने पीने की लालसा छोड़ने का मानसिक दबाव बनाया जा सकता है।*

*अतः उन्हें इस अवसर का लाभ उठाते हुए इस दिशा में पुरजोर संघर्ष करना चाहिए।*

गांव के अंदर इस फालतू के मृत्यु भोज में समाज में कहीं कुर्तियों और वाद विवाद का सामना करना पड़ता है इससे अच्छा इसको हमेशा हमेशा के लिए खत्म करके विचार विमर्श करना चाहिऐ आज बड़ी बड़ी नियाते होती है वहां पर खाली अपनी अपनी जिद की लड़ाई होती है और परिवार और गांव को नुकसान होता है उससे अच्छा तो गांव के अंदर कोई हॉस्पिटल गौशाला या स्कूल निर्माण में वह पैसे खर्च किए जाए सदैव आने वाली सभी पीडिया याद करती है उन पूर्वजो को बहुत सी ऐसी सामाजिक कुरीतियां है जो हमेशा हमेशा के लिए दूसरी समाज की तरह बंद कर देनी चाहिए आज प्रजापत समाज बहुत अच्छी स्थिति में है हर चीज को सोचने और समझने में सक्षम है तो फिर ऐसी कुरीतियां समाज में क्यों चालू है इसलिए बड़े-बड़े भामाशाह से निवेदन है कि इनको हमेशा हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए धन्यवाद

*सुरेन्द्र प्रकाश मेहराणीया 9880392652*
प्रजापति हेमाराम ब्रान्धणा खोखरा 7073414985

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5 thoughts on “मृत्युभोज एक अभिशाप प्रजापति समाज इस पोस्ट को पढकर विचार विमर्श करे”

  1. NERERAJ KUMAR PRAJAPATI

    में और मेरा पूरा परिवार इस मृत्युभोज के ख़िलाफ़ है और आगे भविष्य में भी मेरा परिवार मृत्यु भोज नहि करेगा विगत नवम्बर 2019 को हमारे परिवार में निधन होने पर समाज के जातिगत पंचो ने समाजिक कुरीतियाँ को बढ़ावा देते हुए मृत्युभोज के लिए पाबन्द और बढ़ावा दिया जिसके फलस्वरूप जातिगत पंचो को मृत्यभोज में पाँच मिठाई आदी समाजिक कुरीतियाँ को हमने और हमारे परिवार ने बंद कर दिया जिससे समाज के पँच नाराज़ होकर एक राय चले गए और तुरन्त एक माह के भीतर ही हमारे परिवार का समाजिक बहिष्कार कर लिया।
    हमारे परिवार की हार्दिक इच्छा ये थी की इस कुरीति मृत्यु भोज में आने वाला खर्चे को आप समाजिक उत्थान में किसी धर्मशाला या गरीब बच्चों की शिक्षा में खर्च करे हम आज भी इस बात पर सहमत है।
    इस तरह यदि कोई अच्छा समाजिक कार्य की शुरुआत करे तो भी इन समाज के ठेकेदारों को नहि पचता है तो अब इन पढ़े लिखे बुद्दी जीवियों से हम समाज सुधारने की क्या अपेक्षा करे
    बंधुओ ये एक सत्य घटना राजस्थान के एक छोटे से शहर की है सभी बन्धु इस पर गहरा विचार प्रकट करे।

  2. Pingback: सुरेन्द्र प्रकाश मेहराणीया गाँव देवरिया प्रजापत समाज से मेरी अपील

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